बगलामुखी कवच क्या है

कवच एक ऐसा पवित्र माध्यम है जिसे देवी की शक्ति से ऊर्जावान किया जाता है और धारक की सुरक्षा हेतु धारण किया जाता है। यह ताबीज़, लॉकेट अथवा यंत्र के रूप में हो सकता है, जिस पर बीज मंत्र अंकित होता है।

कवच के प्रकार

मंदिर में उपलब्ध कवच सामान्यतः तीन रूपों में मिलते हैं, जो धातु और उद्देश्य के अनुसार अलग-अलग होते हैं।

  • ताम्र कवच — सामान्य सुरक्षा और मानसिक शांति हेतु
  • चांदी कवच — शत्रु बाधा व नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा हेतु
  • स्वर्ण जड़ित कवच — विशेष एवं दीर्घकालिक साधकों हेतु

कवच को ऊर्जावान करने की विधि

किसी भी कवच को धारण करने से पहले उसे विधिवत मंत्रों द्वारा ऊर्जावान (सिद्ध) किया जाना आवश्यक माना जाता है। नलखेड़ा मंदिर में यह प्रक्रिया अनुभवी पंडितों द्वारा हवन और मंत्र जाप के माध्यम से संपन्न की जाती है।

बिना ऊर्जावान किए गए कवच को केवल एक धातु का टुकड़ा माना जाता है, इसलिए इस चरण को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

कवच धारण करने की विधि

कवच को किसी शुभ दिन, स्नान के पश्चात, देवी की पूजा करके धारण करना चाहिए। धारण करते समय मन में देवी बगलामुखी का ध्यान करना उचित माना जाता है।

  1. प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  2. देवी के समक्ष धूप-दीप जलाकर कवच रखें
  3. मंत्र या स्तोत्र का पाठ करें
  4. श्रद्धा भाव से कवच धारण करें

किस दिन धारण करना शुभ है

मंगलवार, शुक्रवार अथवा नवरात्रि के दिनों को कवच धारण करने के लिए शुभ माना जाता है।

धारण करने के नियम

कवच धारण करने के बाद कुछ नियमों का पालन आवश्यक माना जाता है ताकि इसकी ऊर्जा बनी रहे।

  • स्नान के समय कवच उतार कर सुरक्षित स्थान पर रखें
  • अशुद्ध अवस्था में कवच धारण करने से बचें
  • इसे किसी और को स्पर्श न करने दें
  • वर्ष में एक बार पुनः ऊर्जावान करवाना उचित रहता है

कवच की देखभाल

कवच को नियमित रूप से साफ कपड़े से पोंछें और इसे किसी पवित्र स्थान पर ही उतार कर रखें। यदि कवच का धागा या चेन टूट जाए, तो इसे तुरंत बदलकर पुनः धारण करना चाहिए।

कवच कैसे प्राप्त करें

नलखेड़ा मंदिर से सीधे अथवा हेल्पलाइन के माध्यम से कवच प्राप्त किया जा सकता है। दूर से मंगवाने पर भी यह पूर्ण विधि से ऊर्जावान करके भेजा जाता है।

सच्चा कवच वह है जो बाहरी सुरक्षा के साथ भीतर की शांति भी दे।