साधना से पहले सही समझ आवश्यक है
बगलामुखी साधना को अक्सर केवल शत्रु नाश या तंत्र से जोड़कर देखा जाता है, जबकि वास्तव में यह वाणी सिद्धि, मानसिक स्थिरता, न्यायालयीन विजय और आत्मबल बढ़ाने के लिए भी की जाती है। इसे शुरू करने से पहले सही उद्देश्य और श्रद्धा का होना आवश्यक माना जाता है।
गृहस्थ साधकों को सलाह दी जाती है कि वे बिना किसी योग्य गुरु या मंदिर के मार्गदर्शन के स्वयं जटिल तांत्रिक प्रयोग न करें, विशेषकर मारण, मोहन जैसे उग्र प्रयोगों से दूर रहें, और केवल शांत, सात्विक साधना अपनाएं।
समय और स्थान से जुड़े नियम
साधना के लिए सही समय और स्थान का चयन उसकी सफलता में बड़ी भूमिका निभाता है, ऐसी मान्यता है।
- रात्रि का समय, विशेषकर पीले (आधी रात के बाद) समय को साधना हेतु उत्तम माना जाता है
- मंगलवार, शनिवार या अष्टमी-नवमी तिथि साधना आरंभ के लिए विशेष शुभ मानी जाती हैं
- साधना कक्ष को स्वच्छ, शांत और एकांत रखना चाहिए
- पीले वस्त्र, पीला आसन और पीले पुष्प इस साधना में प्रयुक्त होते हैं
- साधना स्थल पर अनावश्यक व्यक्तियों का आना-जाना रोकना चाहिए
आहार-विहार के नियम
साधना काल में शरीर और मन दोनों की शुद्धता आवश्यक मानी जाती है, इसलिए आहार-विहार में संयम रखना अत्यंत ज़रूरी है।
- सात्विक, शुद्ध शाकाहारी भोजन ही ग्रहण करें
- मदिरा, तामसिक भोजन और अनावश्यक वाद-विवाद से दूर रहें
- साधना अवधि में ब्रह्मचर्य का पालन करने की सलाह दी जाती है
- क्रोध, ईर्ष्या और नकारात्मक विचारों से यथासंभव बचें
- दिनचर्या में नियमितता और समय की पाबंदी बनाए रखें
गृहस्थ साधकों के लिए विशेष सुझाव
गृहस्थ जीवन में पूर्णतः वैराग्य संभव नहीं होता, इसलिए साधकों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी दैनिक ज़िम्मेदारियों को निभाते हुए एक निश्चित समय साधना के लिए अलग रखें। यह समय चाहे 15 मिनट का ही क्यों न हो, नियमितता सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।
माला और मंत्र संख्या का नियम
बगलामुखी मंत्र जाप में हल्दी की माला का प्रयोग परंपरागत रूप से किया जाता है। साधक की क्षमता अनुसार 11, 21 या 108 माला जाप का संकल्प लिया जा सकता है। बड़े अनुष्ठान जैसे 36,000 मंत्र जाप या सवा लाख महा अनुष्ठान के लिए योग्य पंडितों की उपस्थिति में मंदिर में विधिवत आयोजन करना उचित माना जाता है।
साधना में शक्ति मंत्र की संख्या में नहीं, बल्कि अनुशासन और श्रद्धा की निरंतरता में निहित होती है।
साधना के दौरान सावधानियां
- बिना गुरु मार्गदर्शन के जटिल तांत्रिक प्रयोगों से बचें
- साधना के बीच में मंत्र या नियम अचानक न बदलें
- अहंकार या प्रतिशोध की भावना से साधना आरंभ न करें
- साधना पूर्ण होने के बाद विधिवत उद्यापन अवश्य करें
- स्वास्थ्य या मानसिक स्थिति ठीक न होने पर साधना पंडित जी के परामर्श से ही करें
नलखेड़ा मंदिर में साधना मार्गदर्शन
जो साधक बगलामुखी साधना गंभीरता से करना चाहते हैं, उनके लिए नलखेड़ा मंदिर में आचार्य सतीश शर्मा द्वारा उचित मंत्र, विधि और समय का परामर्श दिया जाता है। शुरुआती साधकों को मंदिर में उपस्थित रहकर पहली साधना करने की सलाह दी जाती है ताकि विधि सही ढंग से समझ में आ सके।



