मूल मंत्र का स्वरूप
बगलामुखी मूल मंत्र एक बीज मंत्र आधारित साधना है जो सामान्यतः गुरु दीक्षा के पश्चात ही पूर्ण विधि से जपा जाता है। सार्वजनिक रूप से केवल सामान्य नाम-जाप या स्तोत्र पाठ की सलाह दी जाती है, जब तक कि विधिवत दीक्षा प्राप्त न हो।
आचार्य सतीश शर्मा के मार्गदर्शन में साधक पहले सरल मंत्रों से आरंभ करते हैं और फिर धीरे-धीरे उन्नत साधना की ओर बढ़ते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि साधना सुरक्षित और फलदायी रहे।
जाप की संख्या
पारंपरिक रूप से मंत्र जाप की संख्या 11 माला, 21 माला अथवा एक पूर्ण अनुष्ठान में सवा लाख (1,25,000) तक होती है। सवा लाख अनुष्ठान मंदिर में विशेष रूप से संपन्न कराया जाता है जिसमें अनुभवी पंडितों की टीम सम्मिलित होती है।
- नियमित साधक: प्रतिदिन 1-3 माला
- विशेष उद्देश्य हेतु: 11 या 21 दिन तक निरंतर जाप
- सवा लाख महा अनुष्ठान: मंदिर में समूह द्वारा संपन्न
माला का चयन
बगलामुखी साधना में पीली या हल्दी की माला का प्रयोग सर्वोत्तम माना जाता है। कुछ साधक हल्दी की गांठों से बनी माला या कमल गट्टे की माला भी प्रयोग करते हैं। माला को हमेशा पीले वस्त्र में लपेट कर रखना चाहिए।
माला की शुद्धि
नई माला को जाप आरंभ करने से पहले गंगाजल से शुद्ध करना चाहिए और देवी के समक्ष रखकर धूप-दीप से पूजन करना चाहिए। माला का प्रयोग किसी और को न दें, यह व्यक्तिगत साधना का माध्यम मानी जाती है।
जाप का उचित समय और दिशा
ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटे पूर्व) अथवा रात्रि के समय जाप को सर्वोत्तम माना जाता है। मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखना चाहिए और आसन पीले या ऊनी वस्त्र का होना चाहिए।
- स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
- दीपक और धूप जलाकर आसन ग्रहण करें
- मन को शांत रखकर संकल्प के साथ जाप आरंभ करें
- जाप के बीच बातचीत या उठना उचित नहीं माना जाता
साधना के नियम और सावधानियाँ
बगलामुखी साधना को शक्तिशाली माना जाता है, इसलिए इसे बिना उचित मार्गदर्शन के अत्यधिक उन्नत रूप में न करें। नियमों का पालन आवश्यक है ताकि साधना का प्रभाव सकारात्मक और संतुलित रहे।
- सात्विक भोजन ग्रहण करें, तामसिक भोजन से बचें
- जाप के दौरान क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें
- एक निश्चित स्थान और समय तय करें और उसे बदलें नहीं
- जाप पूर्ण होने पर देवी की आरती अवश्य करें
गुरु मार्गदर्शन का महत्व
किसी भी उन्नत साधना से पहले अनुभवी आचार्य से मार्गदर्शन लेना उचित माना जाता है। आचार्य सतीश शर्मा नलखेड़ा में सैकड़ों साधकों को सही विधि और अनुशासन सिखाते आए हैं।
मंत्र में शक्ति तभी जागती है जब जाप श्रद्धा और नियम दोनों से जुड़ा हो।



